हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हौज़ा ए इल्मिया खुरासान में संस्कृति एवं प्रचार प्रबंधन के निदेशक हुज्जतुल इस्लाम खान अली इब्राहीमी ने इस वर्ष (सन् 1405 हिजरी शम्सी / 2026 ई.) में अशरा-ए-करामत व विलायत के विशेष और अलग संयोजन की ओर इशारा करते हुए कहा, इस वर्ष अशरा-ए-करामत व विलायत पूरी तरह से असाधारण और ऐतिहासिक परिस्थितियों में आयोजित हो रहा है, क्योंकि एक ओर इस्लामी क्रांति के महान नेता, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सैयद अली खामेनेई की मजलूमाना शहादत को लगभग तीन माह बीत चुके हैं, जो न केवल ईरानी राष्ट्र के लिए एक बहुत बड़ी त्रासदी थी, बल्कि इस्लामिक उम्माह और दुनिया के हर जागरूक व्यक्ति के लिए एक गहरा घाव है।
उन्होंने कहा,इस वर्ष ईद-ए-ग़दीर इस्लामी क्रांति के महान संस्थापक हज़रत इमाम खुमैनी (रह) की पुण्यतिथि के दिन आ रही है, और यही संयोजन अशरा-ए-करामत व विलायत के माहौल को एक दुर्लभ और ऐतिहासिक वातावरण में बदल रहा है।
हौज़ा ए इल्मिया खुरासान में संस्कृति एवं प्रचार प्रबंधन के निदेशक ने कहा,इसी ऐतिहासिक दिन को हज़रत इमाम खुमैनी (रह) के देहांत के बाद, विशेषज्ञों की सभा मजलिस-ए-खुबरगान-ए-रहबरी ने इस्लामिक उम्माह के नेतृत्व की जिम्मेदारी हज़रत आयतुल्लाह खामेनेई को सौंपी थी।
उन्होंने कहा, इस वर्ष अशरा-ए-करामत व विलायत, शोक और विलायत के प्रति वफादारी से मिश्रित माहौल में मनाया जाएगा। इन दिनों की योजना इस प्रकार बनाई गई है कि शहीद नेता (रह) के शोक का पहलू भी बरकरार रहे और अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अ.स. की विलायत के त्योहार की शान और महिमा भी किसी भी प्रकार कम न हो।
हुज्जतुल इस्लाम खान अली इब्राहीमी ने कहा, आज एकता को बनाए रखना, इस्लामी क्रांति के मार्ग को जारी रखना, फ़िलस्तीन की रक्षा करना और प्रतिरोध मोर्चे को मजबूत करना, इस्लामिक उम्माह के सभी लोगों पर एक गंभीर जिम्मेदारी है।
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